बीजिंग: लोकतंत्र और छात्र आंदोलन की आवाज को कुचलने के लिए चार जून, 1989 को चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने इस शहर की सड़कों पर अपने ही लोगों की तरफ फौज की बख्तरबंद गाडि़यों और टैंकों का मुंह मोड़ दिया था. उस घटना के लगभग 30 साल गुजरने के बावजूद चीन में इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बात करना एक तरीके से अभी भी गुस्ताखी मानी जाती है. इस तरह की आवाज उठाने वालों को यातनाएं दी जाती हैं. चीन ने कभी भी अंतरराष्ट्रीय जगत को इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया.
इसी कड़ी में 4 जून, 1989 में थ्येनआनमन स्क्वायर पर हुए प्रदर्शनों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई के बारे में चीन में सूचना गायब होने की परंपरा ने इस चार जून को उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब एक लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप के उपयोगकर्ता बरसी की तारीख के कारण एक-दूसरे को 89.64 युआन या 64.89 युआन की रकम नहीं भेज सके. ये रकम इसलिए नहीं भेजी जा सकी क्योंकि 89, 6 या 4 अंक चार जून 1989 में आते हैं और इसी तारीख को थ्येनआनमन स्क्वायर पर दमनात्मक कार्रवाई की गई थी.
सोमवार को ‘वी चैट’ एप्लीकेशन के उपयोगकर्ता इस घटना की बरसी की तारीख के कारण ''लाल लिफाफे'' या धन से भरे पैकेट में 89.64 युआन या 64.89 युआन की रकम नहीं भेज सके. कुछ लोगों का अनुमान है कि इस भयावह घटना में हजारों लोग मारे गये थे. इस घटना की बरसी पर सोशल मीडिया पर काफी नियंत्रण रखा जाता है. अमेरिका ने सोमवार को चीन से यह बताने को कहा कि थ्येनआनमन चौक में कितने लोगों की जान गई थी.
थ्येनआनमन चौक निहत्थे नागरिकों पर टूटा था कहर
चार जून 1989 को चीन की राजधानी बीजिंग में कम्युनिस्ट पार्टी ने लोकतांत्रिक सुधारों का आह्वान करने वाले छात्र नीत प्रदर्शन को कुचलने के लिए टैंक भेजे थे. सेना ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर बंदूकों और टैंकों से कार्रवाई की जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए. इसे इतिहास में ‘थ्येनआनमन स्क्वायर नरसंहार’ के तौर पर जाना जाता है.
Source:-ZEENEWS
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इसी कड़ी में 4 जून, 1989 में थ्येनआनमन स्क्वायर पर हुए प्रदर्शनों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई के बारे में चीन में सूचना गायब होने की परंपरा ने इस चार जून को उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब एक लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप के उपयोगकर्ता बरसी की तारीख के कारण एक-दूसरे को 89.64 युआन या 64.89 युआन की रकम नहीं भेज सके. ये रकम इसलिए नहीं भेजी जा सकी क्योंकि 89, 6 या 4 अंक चार जून 1989 में आते हैं और इसी तारीख को थ्येनआनमन स्क्वायर पर दमनात्मक कार्रवाई की गई थी.
सोमवार को ‘वी चैट’ एप्लीकेशन के उपयोगकर्ता इस घटना की बरसी की तारीख के कारण ''लाल लिफाफे'' या धन से भरे पैकेट में 89.64 युआन या 64.89 युआन की रकम नहीं भेज सके. कुछ लोगों का अनुमान है कि इस भयावह घटना में हजारों लोग मारे गये थे. इस घटना की बरसी पर सोशल मीडिया पर काफी नियंत्रण रखा जाता है. अमेरिका ने सोमवार को चीन से यह बताने को कहा कि थ्येनआनमन चौक में कितने लोगों की जान गई थी.
थ्येनआनमन चौक निहत्थे नागरिकों पर टूटा था कहर
चार जून 1989 को चीन की राजधानी बीजिंग में कम्युनिस्ट पार्टी ने लोकतांत्रिक सुधारों का आह्वान करने वाले छात्र नीत प्रदर्शन को कुचलने के लिए टैंक भेजे थे. सेना ने शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर बंदूकों और टैंकों से कार्रवाई की जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए. इसे इतिहास में ‘थ्येनआनमन स्क्वायर नरसंहार’ के तौर पर जाना जाता है.
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