नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के सीहोर की बुजुर्ग महिला लक्ष्मीबाई सोशल मीडिया के जरिए आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं. दरअसल, 12 जून को क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने मध्य प्रदेश के सीहोर की रहने वाली लक्ष्मीबाई का वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था. इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने उन्हें सुपरवुमन बताया था, जिसके बाद अब खुद लक्ष्मीबाई ने अपने बारे में बताया. 72 साल की लक्ष्मीबाई ने बताया कि वह यह काम उनके द्वारा लिए गए उधार को चुकाने के लिए कर रही हैं.
दरअसल, लक्ष्मीबाई सीहोर में डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट में बैठती हैं और डोक्यूमेंट्स टाइप करती हैं. अपने काम के बारे में बात करते हुए उन्होंने एएनआई से कहा है कि मेरी बेटी के एक्सीडेंट के बाद उसके इलाज के लिए मैंने लोन लिया था, जिसमें चुकाने के लिए मैं यह काम करती हूं. मैं भीख नहीं मांग सकती. मुझे यह नौकरी कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसडीएम भावना बिलम्बे की मदद से मिली और मुझे अच्छा लगा कि वीरेंद्र सहवाग ने मेरी वीडियो शेयर की. मुझे अपने उधार को चुकाने और अपना घर बनाने के लिए मदद की जरूरत है.
दरअसल, लक्ष्मीबाई आज कई लोगों के लिए प्रेरणा हैं. लक्ष्मीबाई भले ही आज 72 साल की हों लेकिन उनमें आज भी काम के प्रति जुनून और जज्बा है. उन्होंने अपने संघर्षों से कभी हार नहीं मानी. उन्होंने बताया कि संघर्ष हमेशा ही उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा है. उन्होंने कहा, 5 दशक पहले उनके वैवाहिक जीवन में दरार आने के बाद से ही उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने की ठान ली थी. उन्होंने का कि उनकी दीव्यांग बेटी के कारण उनके वैवाहिक जीवन में परेशानी आई और उनके पति ने उन्हें और उनकी बेटी को छोड़ दिया. उन्होंने आगे बताया, इसके बाद मैंने इंदौर के सहकारी बाजार में पैकिंग का शुरू किया. उस काम से किसी तरह घर का गुजारा चल जाता था. इस काम को करते हुए ही मैंने टाइपिंग सीखी लेकिन कुछ वक्त बाद ही सहकारी बाजार बंद हो गया.
Source:-ZEENEWS
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दरअसल, लक्ष्मीबाई सीहोर में डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट में बैठती हैं और डोक्यूमेंट्स टाइप करती हैं. अपने काम के बारे में बात करते हुए उन्होंने एएनआई से कहा है कि मेरी बेटी के एक्सीडेंट के बाद उसके इलाज के लिए मैंने लोन लिया था, जिसमें चुकाने के लिए मैं यह काम करती हूं. मैं भीख नहीं मांग सकती. मुझे यह नौकरी कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और एसडीएम भावना बिलम्बे की मदद से मिली और मुझे अच्छा लगा कि वीरेंद्र सहवाग ने मेरी वीडियो शेयर की. मुझे अपने उधार को चुकाने और अपना घर बनाने के लिए मदद की जरूरत है.
दरअसल, लक्ष्मीबाई आज कई लोगों के लिए प्रेरणा हैं. लक्ष्मीबाई भले ही आज 72 साल की हों लेकिन उनमें आज भी काम के प्रति जुनून और जज्बा है. उन्होंने अपने संघर्षों से कभी हार नहीं मानी. उन्होंने बताया कि संघर्ष हमेशा ही उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा है. उन्होंने कहा, 5 दशक पहले उनके वैवाहिक जीवन में दरार आने के बाद से ही उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने की ठान ली थी. उन्होंने का कि उनकी दीव्यांग बेटी के कारण उनके वैवाहिक जीवन में परेशानी आई और उनके पति ने उन्हें और उनकी बेटी को छोड़ दिया. उन्होंने आगे बताया, इसके बाद मैंने इंदौर के सहकारी बाजार में पैकिंग का शुरू किया. उस काम से किसी तरह घर का गुजारा चल जाता था. इस काम को करते हुए ही मैंने टाइपिंग सीखी लेकिन कुछ वक्त बाद ही सहकारी बाजार बंद हो गया.
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