Tuesday, 10 April 2018

5 बिंदुओं में समझिए BJP, सरकार और देश के लिए जेटली की अहमियत

वित्त मंत्री अरुण जेटली किडनी संबंधित समस्याओं से जूझ रहे हैं. दिल्ली के एम्स में डायलिसिस कराने के बाद वह सोमवार को अपने घर लौट आए. उनका किडनी ट्रांसप्लांट फिलहाल नहीं हो पाया है. गंभीर रूप से बीमार रहने के बावजूद जेटली ने काम करना बंद नहीं किया है. इसकी वजह शायद यही हो सकती है कि उनके कंधों पर काम की जिम्मेदारी बहुत ज्यादा है.

गत 5 अप्रैल को अपनी सेहत की जानकारी सार्वजनिक करते हुए जेटली ने एक ट्वीट किया था कि वह किडनी से संबंधि‍त कुछ समस्याओं और संक्रमण से जूझ रहे हैं. उन्होंने बताया था कि फिलहाल वह घर पर ही नियंत्रित वातावरण में रह रहे हैं.

1. सरकार

सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) संभवत: सरकार का सबसे हाई-प्रोफाइल समूह है. प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं और इसमें रक्षा, वित्त, गृह और विदेश मंत्री शामिल होते हैं. नरेंद्र मोदी सरकार ने जब 26 मई, 2014 को शपथग्रहण किया तो जेटली को दो महत्वपूर्ण विभाग वित्त और रक्षा मंत्रालय दिए गए. इस तरह सीसीएस के चार मंत्रालयों में से दो उनके पास थे.

2. विपक्ष के नेता

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान अरुण जेटली को राज्यसभा में विपक्ष के नेता जैसा महत्वपूर्ण दायित्व मिला था. राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में वह मनमोहन सिंह सरकार पर बीजेपी के हमलों के दौरान अगुआ रहते थे. तत्कालीन वित्त और गृह मंत्री पी. चिदम्बरम से राज्यसभा में उनकी वैसी ही लंबी बहसें होती थीं, जैसे दो वकील किसी अदालत में जिरह कर रहे हों. दोनों नेता देश के जाने-माने वकील हैं.

3. मोदी के करीबी

अरुण जेटली को हमेशा ही नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है. माना जाता है कि साल 2001 में गुजरात में पहली बार नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री बनवाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इसके बाद साल 2013 में मोदी के बीजेपी प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने में भी अरुण जेटली की अहम भूमिका रही. ऐसा माना जाता है कि साल 2002 के गुजरात दंगों के बाद जब नरेंद्र मोदी की स्थ‍िति थोड़ी कमजोर हुई, तो जेटली ने उन्हें मजबूती से समर्थन दिया.

4. चुनावी राजनीति

अरुण जेटली हमेशा से ही बीजेपी के महत्वपूर्ण रणनीतिकार रहे हैं. बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष अमित शाह के राष्ट्रीय फलक पर उभरने से काफी पहले से ही जेटली लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति बनाने के लिहाज से एक प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं.

5. वकील

एक जाने-माने वकील के रूप में भी अरुण जेटली की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. उन्होंने विभिन्न अदालतों में अपनी पार्टी बीजेपी और पार्टी के कई नेताओं का भी बचाव किया है. अरुण जेटली से जुड़े करीबी सूत्रों ने इंडिया टुडे-आजतक को बताया कि उन्होंने गुजरात दंगों के मामलों में कई अदालतों में मोदी का भी बचाव किया है. विवादास्पद सोहराबुद्दीन और इशरत जहां एनकाउंटर मामले में उन्होंने अमित शाह का भी बचाव किया है. जेटली या तो ऐसे मामलों में खुद कोर्ट में पैरवी के लिए गए या उन्होंने पैरवी कर रहे वकीलों का मार्गदर्शन किया.

Source:-Aajtak

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