विडंबना देखिए कि 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार को आर्थिक नीतियों पर जमकर कोसा. प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने विकल्प के तौर पर कांग्रेस से उलट आर्थिक नीति की पेशकश की और सत्ता पर काबिज हुई. विडंबना यह कि 1980 में बनी इस पार्टी के पास कोई स्पष्ट आर्थिक नीति नहीं थी और अब लगभग चार साल तक सत्ता पर काबिज रहने के बाद विकल्प देना तो दूर कहा जा सकता है कि दोनों भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी की आर्थिक नीति में कोई अंतर नहीं है.
इसी नतीजे को आधार बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले शाइनिंग इंडिया का मसौदा रखा. इस मसौदे के साथ पार्टी ने अपनी नीति भी स्पष्ट की कि मुक्त व्यापार के जरिए ही समाज के सभी क्षेत्र उन्नत कर सकेंगे. आर्थिक नीति में यह बदलाव सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर देखने को नहीं मिला. भारतीय जनता पार्टी शाषित प्रमुख राज्यों में भी इस नीति पर पहल हुई और इसका भी नतीजा रहा कि पार्टी द्वारा शाषित राज्यों में विकास दर में अच्छी बढ़त देखने को मिली.
इसके बाद 2004 से लेकर 2014 तक एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में बैठी. इस दौरान एक बार फिर पार्टी ने कांग्रेस की आर्थिक नीतियों का विरोध शुरू किया. बात देश में एक कर व्यवस्था लागू करने की हो तो पार्टी ने कांग्रेस के मसौदे को पूरी तरह नकार दिया. या फिर कांग्रेस सरकार द्वारा इनकम टैक्स में इजाफे की पहले हो तो इनकम टैक्स की व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की दलील दी गई. लेकिन 2014 में जब पार्टी सत्ता में वापसी करती है तो उसी जीएसटी को सबसे बड़े सुधार के तौर पर लागू किया गया. वहीं बीते चार साल के कार्यकाल के दौरान इनकम टैक्स को खत्म करने की दलील तो दूर सरकार की कमाई बढ़ाने के लिए लगातार टैक्स दायरे को बढ़ाने का काम किया गया. लिहाजा, यह कहा जाए कि सत्ता में बैठी कांग्रेस और बीजेपी की आर्थिक नीति में कोई अंतर नहीं है तो इसके पक्ष में मजबूत तर्क सरकार ने कार्यकाल के दौरान पेश किया है.
Source:-Aajtak
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इसी नतीजे को आधार बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने 2004 के लोकसभा चुनावों से पहले शाइनिंग इंडिया का मसौदा रखा. इस मसौदे के साथ पार्टी ने अपनी नीति भी स्पष्ट की कि मुक्त व्यापार के जरिए ही समाज के सभी क्षेत्र उन्नत कर सकेंगे. आर्थिक नीति में यह बदलाव सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर देखने को नहीं मिला. भारतीय जनता पार्टी शाषित प्रमुख राज्यों में भी इस नीति पर पहल हुई और इसका भी नतीजा रहा कि पार्टी द्वारा शाषित राज्यों में विकास दर में अच्छी बढ़त देखने को मिली.
इसके बाद 2004 से लेकर 2014 तक एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में बैठी. इस दौरान एक बार फिर पार्टी ने कांग्रेस की आर्थिक नीतियों का विरोध शुरू किया. बात देश में एक कर व्यवस्था लागू करने की हो तो पार्टी ने कांग्रेस के मसौदे को पूरी तरह नकार दिया. या फिर कांग्रेस सरकार द्वारा इनकम टैक्स में इजाफे की पहले हो तो इनकम टैक्स की व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की दलील दी गई. लेकिन 2014 में जब पार्टी सत्ता में वापसी करती है तो उसी जीएसटी को सबसे बड़े सुधार के तौर पर लागू किया गया. वहीं बीते चार साल के कार्यकाल के दौरान इनकम टैक्स को खत्म करने की दलील तो दूर सरकार की कमाई बढ़ाने के लिए लगातार टैक्स दायरे को बढ़ाने का काम किया गया. लिहाजा, यह कहा जाए कि सत्ता में बैठी कांग्रेस और बीजेपी की आर्थिक नीति में कोई अंतर नहीं है तो इसके पक्ष में मजबूत तर्क सरकार ने कार्यकाल के दौरान पेश किया है.
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